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Mere Sapnon (RTI Song in Hindi)

Mere Sapnon ko Jaane ka Haq

My Dreams, My Right to Know ... a song by Charul & Vinay 
 
मेरे सपनो को जानने का हक रे
क्यों सदियों से टूट रही है
इनको सजने का नाम नहीं
 
मेरे हाथों को जानने का हक रे
क्यों बरसों से खली पड़ी हैं
इन्हें आज भी ककम नहीं है
 
मेरी पैरों को यह जानने का हक रे
क्यों गाँव गाँव चलना पड़ा रे
क्यों बस की निशान नहीं
 
मीर भूक को जानने का हक रे
क्यों गोदामों में सड़ते हैं दाने
मुझे मुट्ठी भर दाना नहीं
 
मेरी बूढी माँ को जानने का हक रे
क्यों गोली नहीं सुई दवाखाने
पट्टी टाकने  का सामान नहीं
 
मेरे खेतों को यह जानने का हक रे
क्यों बाँध बने हैं बड़े बड़े
तो भी फसल में जान नहीं
 
मेरे जंगलों को यह जानने का हक रे
कहाँ डालियाँ वोह पत्ते टेल मिटटी
क्यों झरनों का नाम नहीं
 
मेरे नदियों को यह जानने का हक रे
क्यों ज़हर मिलाये कारखाने
जैसे नदियों में जान नहीं
 
मेरे गाँव को यह जानने का हक रे
क्यों बिजली न सदके न पानी
खुली राशन की दुकान नहीं
 
मेरे वोटों को यहे जानने का हक रे
क्यों एक दिन बड़े बड़े वाडे
फीर पांच साल काम नहीं
 
मेरे राम को यह जानने का हक रे
रहमान को यह जानने का हक रे
क्यों खून बह रहे सड़कों में
क्या सब इन्सान नहीं
 
मरी ज़िन्दगी को यह जानने का हक रे
अब हक के बिना भी क्या जीना
यह जीने के समान नहीं
 
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